Astrovastuyantra

Friday, 25 September 2015

द्वादशमुखी रुद्राक्ष (Twelve Mukhi Rudraksh)


बारहमुखी रुद्राक्ष साक्षात सूर्य स्वरूप है। इसके धारण करने से मान-सम्मान की वृद्धि होती है तथा सूर्य देव प्रसन्न होते है। ज्योतिषशास्त्रनुसार सूर्य कुंडली में आत्मा, पिता, ऊर्जा तथा सरकार इत्यादि का कारक है। यदि किसी कारणवश कुंडली में सूर्य कमजोर है तो जीवन में संघर्ष ही संघर्ष बना रहता है साथ ही मान सम्मान की कमी होती है। बिना संघर्ष के सफलता नहीं मिलती है। जातक में निराशा तथा परेशानी एक साथ चलती रहती है। अतः इसे दूर करने के लिए सूर्य का कुंडली में बलि होना बहुत आवश्यक है। यदि कोई जातक द्वादशमुखी रुद्राक्ष धारण करता है तो वह सभी  समस्याओ से छुटकारा पा सकता है ।
आदित्यादेव भूतानि जायन्ते के अनुसार सूर्य इस भूमण्डल पर सभी जीवो की उत्पत्ति का कारक है।सूर्य ग्रह-मंडल के मध्य राजा की तरह है उसी प्रकार जो मनुष्य इस रुद्राक्ष को धारण करता है वह अपने देश और काल का सम्राट बन जाता है। जिस प्रकार सूर्य इस संसार के अन्धकार को दूर करता है उसी प्रकार रुद्राक्ष धारणकर्ता के मन के भीतर के निराशा पीड़ा दुःख इत्यादि को दूर कर देता हैं। द्वादशमुखी रुद्राक्ष के विषय में जानने के लिए देखे।www.astroyantra.com/बारहमुखी-रुद्राक्ष-मंत्र/

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