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Sunday, 10 July 2016

जाने ! शपथ ग्रहण मुहुर्त का निर्धारण कैसे होता है

जाने ! शपथ ग्रहण मुहुर्त का निर्धारण कैसे होता है 
शपथ ग्रहण मुहुर्त विधि का निर्धारण प्राचीन काल से ही चली आ रही है।  किसी भी कार्य करने से पहले शुभ मुहूर्त देखकर कार्य प्रारम्भ करने की परम्परा रही है प्राचीन काल से ही रही है। । राजतन्त्र की व्यवस्था में राजज्योतिषी से शुभ मुहूर्त निकलवाकर ही राज्याभिषेक का आयोजन किया जाता था। अब राजतंत्र की व्यवस्था के स्थान पर प्रजातांत्रिक व्यवस्था आ गयी है। इस व्यवस्था में भी शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन शुभ मुहूर्त के आधार पर किया जाता है।


आज भी सभी चुनाव के बाद लोकसभा, विधानसभा, राज्यसभा के सदस्य पद और गोपनियता की शपथ लेकर ही पदभार ग्रहण करते है और अपना पद की जिम्मेदारी के अनुरूप कार्य करना शुरू करते हैं।  कहा जाता है कि शुभ कार्यो के लिए शुभ मुहूर्त का चयन करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है तथा पद की गरिमा स्थायी रूप से बनी रहती है।
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